दीवाली की पटाखों की गूंज अभी कान में गूंज अभी कान से खत्मनहीं हो पायी है की रंगों ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है ..समय की गति इतनी तेज लग रही है की मानो वो हमे अपने साथ चलने ही नहीं देना चाहता.. कभी सोचो तो लगता है की अभी कुछ ही दिनों पहले ही तो दीयों की रौशनी ,पटाखों की गूंज थी ..और अब रंगों ने भी आने की जिद्द कर रक्खी है.. वैसे भी ऐसा लगना स्वाभाविक है क्यूंकि हम सभी जानते है की इस वर्ष विवाह के मुहर्त बहुत अधिक है और ऊपर से चार वर्ष के अन्तराल के बाद आया ये विश्वकप का मुकाबला वो भी अपने देश में.ऐसा लग रहा जैसे जशन मनाने का सीजन ही चल रहा हो .ऐसे में लोग अपनी ख़ुशी का इज़हार पटाखों से ही करते है, अब चाहे शादी हो या मैच दोनों ने ही लोगो की खुशियों को दुगना कर रक्खा है.ठीक वैसे ही जिस तरह दबंग में मुन्नी के नाम के साथ बाम का साथ था ..अब पटाखे जो है हमरा साथ छोड़ना नहीं चाहते और रंग भी हमारे पास आने का इंतज़ार कर रहे है रंगों की भी अपनी अलग ही कश्मकश है जो इंसानों के असली रंगों को छुपा देता है और अपने रंग में ढाल लेता है.. इन सबको देखकर ऐसा लगता मानो हमारी खुशिया दो गुनी नहीं बल्कि तीन गुनी होने वाली है... इस बार मौका है दिवाली और होली दोनों के जशन को साथ में मानाने का .

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