तिरंगे का अपमान या सम्मान
"विजय विश्व तिरंगा प्यारा झंडा उंचा रहे हमारा "इन पंक्तियों कितनी वास्तविकता है ये हम पुरे साल में दो दिन गद्तंत्र और स्वतंत्रता दिवस को छोड़कर जान सकते है जिस तिरंगे को लोग अपनी झूठी शान के लिए फ़हराते है उन दो दिनों के बाद इसकी क्या दुर्दशा होती है ये सब जानते है....ये लोगो की धूल के सामान हो जाता है..या फिर कभी मंदिरा बेदी जैसी नायिका की साडी पर पैरो की तरफ लहराता नजर आता है.. या कभी लोगो की गाडियों के कुचला जाता है तो कभी कूड़े के डिब्बे में फेका हुआ नज़र आता है...क्या ये सिर्फ है लोगो की झूठी शान या फिर है हमारे तिरंगे की पहचान .......!!!!!!!!!!!!!!
