.कभी इस गली तो कभी उस गली ,कभी इस मोहल्ले तो कभी उस मोहल्ले ,कभी इस शहर तो कबी उस शहर,जगह चाहे कोई भी भी क्यों न हो हर जगह पहुचने वाली सिर्फ सड़क ही होती है...रोज़ न जाने कितने मुसाफिरों को ये अपनी मंजिल से पहुचती है कभी सोचो तो कितना अजीब लगता है की एक ही सड़क में चलने वाले कितने मुसाफिर होते है ओर जब वो इन सड़क से अपने मंजिल की ओर जाते है अलग अलग विचार उनके मन में आते है.. वैसे अगर कहा जाए तो ये भी सही होगा की अगर हम अकेले इन सडको पे चल रहे है ...तो हमे अपने आपसे बात करने का सबसे सही मौका यही मिलता है ...
हर रास्ते में कुछ समय बाद मोड़ आते है ठीक वैसे ही जैसे हमारी ज़िन्दगी में उतार चड़ाव आते है पर हमे ही ये तय करना होता है की कौन सा मोड़ हमे हमारी मंजिल तक पहुचायेगा ....वैसे ही जैसे मुश्किल वक़्त में हमे ये तय करना होता है कौन सा हमारी ज़िन्दगी का सही फैसला होगा....अगर हम अपनी ज़िन्दगी की परिसिथितियो को इस सड़क के पहलू से देखे तो ये गलत नहीं होगा हमारी ज़िन्दगी भी कहीं न कहीं इन्ही सड़क की मोड़ की तरह है............

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