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Monday, March 7, 2011

"रिश्वत की कुर्सियां "

              
अब तक हमने न जाने अपनी ज़िन्दगी में कितनी ही कुर्सियौं  को देखा होगा ..पर क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश की है की असल में इन कुर्सियौं  की कीमत क्या है शायद  अभी भी अप यही सोच रहे होंगे की इसमें जानने जैसी वाली बात क्या है यही कुछ सौ और हज़ार रुपये में मिल जाएगी ये कुर्सिया लेकिन अगर आप यहिब सोच रहे है तो शायद  आप ये भूल रहे है की जिंदगी के मोड़ कभी न कभी हमे कुर्सियौं  की असली कीमत पता चल ही जाती है ...अब अगर हम बचपन से शुरू करे तो एक अच्छे स्कूल में एक मामूली कुर्सी  पाने के लिए न जाने हमे कितने पापड बेलने पड़ते है और रिश्वत में कितने ही पैसे देने पड़ जाते  है सिर्फ पड़ने की एक कुर्सी के लिए...आगे बड़े तो किसी अच्छे कॉलेज में भी एक सीट पाने के लिए न जाने लाखो रुपये  रिश्वत  में दे दिए जाते है. अब अगर हम ये देखे की जब सरकारी नौकरी में भी तो सिर्फ एक सीट पाने के लिए लोग पहले लम्बी लाइन लगाकर फॉर्म भरते है और फिर वहां भी कुर्सी को पाने के लिए लाखो रुपये रिश्वत में देने को हमेशा तैयार रहते है ... अरे भाई इतनी बात करके हम अपने नेताओं  की बात न करे ऐसा  कैसे हो सकता है  उनके लिए उस कुर्सी की कीमत क्या होती है ये तो हम सभी जान सकते है .मुंह में पान दबाये , सफ़ेद कपड़ो में अपने को लपेटे हुए, आँखों में  चश्मा की भले ही keemat मामूली सी हो पर  अपनी एक कुर्सी में मानो उनकी जान अटकी हुई होती है... हाँ वो रिश्वत दे या न दे पर लेते जरुर है ... माने या माने हम लेकिन कुर्सियौं की कीमत  बहुत है  भैया.......

1 comment:

  1. kursi chahe tumhari ho dusro ki kursi to kursi hoti hai anu aur rahi baat riswat ki to vo to hum ghar se hi sikhate hai bachpan me aap ko bhi lalach mila hoga first aye to ghadi varna chadi...kyu anu maine sahi kaha ya nahi...

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