"पैसे वालो फिर न करो यूँ अपनी नियत खोटी,मत निकालो ऐसे एक्स्चेंग ऑफर की छीन जाए हमारी रोजी रोटी " पहले आने वाला relience का सब्जी मार्केट हो या अब लोगो के बीच अपनी जगह बनाने वाला बिग बाज़ार का एक्स्चेंग ऑफर.हो न हो दोनों ने कहीं न कहीं गरीबो की रोजी रोटी पर मानो ग्रहण सा लगा रक्खा है.
आज सवेरे ही पापा ने जब रोड पर जा रहे किसी कबाड़ी वाले को कबाड़ का सामान देने के लिए आवाज़ लगाईं तो उसके मासूमियत भरे चेहरे और दर्द से केवल एक ही आवाज़ सुनाई दी "कि इन बिग बाज़ार वालो के एक्स्चेंग ऑफर ने हमारा सारा धंधा चौपट कर दिया है बड़े लोगो ने घोटालो से पूरे देश को लूटने के बाद अब हम गरीबो को भी लूटने कि शाजिश बना ली है हमारी थोड़ी सी कमाई पर भी मानो उनकी नियत कि खोट नज़र आ रही है" और आम लोग भी हम गरीबो को लूटने में उन पैसे वालो का पूरा साथ दे रहे हैं..
बात तो कही न कहीं सही भी है अब लोगो का इंटेरेस्ट 9 रुपये किलो के अखबार से ज्यादा 35 रुपये किलो के अखबार में ज्यादा होगा..कुछ भी हो जनाब! पैसा हर जगह बोलता है पैसा कभी किसी को काटता नहीं है फिर चाहे वो अमीर का हो या गरीब का और जिसके पास जितना हो उतना ही कम रहता है.. हर कोई अपना ही फायदा चाहता है अब देखो बिग बाज़ार वाले अपने फायदे के लिए कबाड़ भी लेना शुरू कर दिए,तो बिग बाज़ार वाले तो सबसे बड़े कबाड़ी है और लोग अपने फायदे के लिए उनको कबाड़ भी दे रहे है लोग अभी भी इसी मुगालते में रह रहे है कि उन्हें कबाड़ कि जगह अच्छे.ब्रांडेड कपडे मिल रहे है भले ही उससे ज्यादा पैसा मिलाकर ही क्यों न खरीदना पड़े..फिर अगर वो किसी शौपिंग मॉल से ख़रीदा हो तो फिर लोगो के बीच अपनी कुछ अलग ही पहचान बनाने का तरीका का ..और लोगो को ये अच्छा भी लगता है वो इस बात से अनजान बनने कि कोशिश करते है कि घर से बिगबाजार तक अपने कबाड़ को ले जाने में उनका कितना पैसा खर्च हुआ . वैसे लोग भी कम चालाक नही है वो यही चाहते है कि एक तीर से जितने ज्यादा निशाने लगे उतने लगा ले ..
फिर ऐसे तो उन्हें एक तीर से तीन निशाने लगाने मौका मिल रहा है तो वो चूंक कैसे सकते है . पहला तो घर का कबाड़ भी साफ़ हो जाएगा ,दूसरा मॉल का मॉल भी घूम लेंगे और तीसरा हाई-फाई जगह से कपडे भी खरीद लेंगे...जो सबके लिए थोडा मुश्किल होता है कि ऐसी हाई-फाई जगह से कपडे या फिर कोई और सामान खरीदना ऐसे में तो भैया आपकी रोजी रोटी में ग्रहण लगना स्वाभाविक है...
हम तो भैया यही कहेंगे रोड पे उन कबाड़ खरीदने वाले लोगो से कि अपने हक़ के लिए लड़ना सीखो.. जिस तरह जाट लोग अपने आरक्षण के हक़ के लिए लड़ रहे है .. तुम्हे भी ये सीखना पड़ेगा .. वो कहते है न " जहाँ सच नहीं चले वहां झूठ सही, और जहाँ हक़ न मिले वहां लूट सही "
अच्छा प्रयास अनुभा
ReplyDeleteshukriya sir....
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